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जयोस्तुते श्री श्री महन्मंगले
शिवास्पदे शिवास्पदे शुभदे।।
स्वतंत्रते भगवती त्वामहं यशोयुतां वंदे।।धृ.।।
राष्ट्राचे चैतन्य मूर्त तू नीति संपदांची।
स्वतंत्रते भगवती श्रीमती राज्ञी तू त्यांची।
परवशतेच्या नभात तूची आकाशी होशी।
स्वतंत्रते भगवती चांदणी चमचम लखलखशी ।।१ ।।
गालावरच्या कुसुमी किंवा कुसुमांच्या गाली।
स्वतंत्रते भगवती तूच जी विलसतसे लाली।
तू सूर्याचे तेज उदधिचे गांभीर्यहि तूची।
स्वतंत्रते भगवती अन्यथा ग्रहण नष्टतेची ।।२ ।।
मोक्षमुक्ति ही तुझीच रूपे तुलाच वेदांती।
स्वतंत्रते भगवती योगिजन परब्रह्म वदती।
जे जे उत्तम उदात्त उन्नत महन्मधुर ते ते।
स्वतंत्रते भगवती सर्व तव सहचारी होते ।।३ ।।
हे अधम रक्त रंजिते सुजन पूजिते।
श्री स्वतंत्रते श्री स्वतंत्रते श्री स्वतंत्रते।
तुजसाठि मरण ते जनन मरण ते जनन।
तुजवीण जनन ते मरण जनन ते मरण।
तुज सकल चराचर शरण चराचर शरण।
श्री स्वतंते श्री स्वतंत्रते श्री स्वतंत्रते।
-स्वातंत्र्यवीर सावरकर
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तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा
तू हिन्दू बनेगा न मुसलमान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा ।
अच्छा है अभी तक तेरा कुछ नाम नहीं है,
तुझको किसी मज़हब से कोई काम नहीं है ।
जिस इल्म ने इंसान को तक़सीम किया है,
उस इल्म का तुझ पर कोई इल्ज़ाम नहीं है।
तू बदले हुए वक्त की पहचान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा।
मालिक ने हर इंसान को इंसान बनाया,
हमने उसे हिन्दू या मुसलमान बनाया।
कुदरत ने तो बख़्शी थी हमें एक ही धरती,
हमने कहीं भारत, कहीं ईरान बनाया।
जो तोड़ दे हर बंद, वो तूफान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा ।
जो सिखाए, वो धरम तेरा नहीं है,
इंसाँ को जो रौंदे, वो क़दम तेरा नहीं है।
कुरआन न हो जिसमें, वो मंदिर नहीं तेरा,
गीता न हो जिसमें, वो हरम तेरा नहीं है।
तू अमन का और सुलह का अरमान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा ।
ये दीन के ताजिर , ये वतन बेचने वाले,
इंसानों की लाशों के कफन बेचने वाले।
ये महल में बैठे हुए कातिल ये लुटेरे,
कांटों के एवज रूह-ए-चमन बेचने वाले।
तू इनके लिए मौत का ऐलान बनेगा,
इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा।
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आचंद्रसूर्य नांदो, स्वातंत्र्य भारताचे
हे राष्ट्र देवतांचे, हे राष्ट्र प्रेषितांचे
आचंद्रसूर्य नांदो, स्वातंत्र्य भारताचे।।धृ.।।
कर्तव्यदक्ष भूमी, सीतारघूत्तमाची
रामायणे घडावी, येथे पराक्रमाची
शिर उंच उच व्हावे, हिमवंत पर्वताचे
आचंद्रसूर्य नांदो, स्वातंत्र्य भारताचे ।।१।।
येथे नसो निराशा, थोड्या पराभवाने
पार्थास बोध केला, येथेच माधवाने
हा देश स्तन्य प्याला, गीतख्य अमृताचे
आचंद्र नांदो, स्वातंत्र्य भारताचे ।।२।।
येथेच मेळ झाला, सामर्थ्य संयमाचा
येथेच जन्म झाला, सिद्धार्थ गौतमाचा
हे क्षेत्र पुण्यदायी, भगवान् तथागताचे
आचंद्रसूर्य नांदो, स्वातंत्र्य भारताचे ।।३।।
हे राष्ट्र विक्रमाचे, हे राष्ट्र शांततेचे
सत्यार्थ झुंड घ्यावी, या जागत्या प्रथेचे
येथे शिव-प्रतापी, नरसिंह योग्यतेचे
आचंद्रसूर्य नांदो स्वातंत्र्य भारताचे ।।४।।
– ग. दि. माडगूळकर
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सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
एक से करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बात-चीत
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है।
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाजु-ए-क़ातिल में है।
वक़्त आने पर बता देंगे तुझे ओ आसमाँ
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है ।
खींच के लाई है सबको क़त्ल होने की उम्मीद
आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-क़ातिल में है।
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छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी
छोड़ो कल की बातें , कल की बात पुरानी ,
नये दौर में लिखेंगे मिलकर नई कहानी।
हम हिन्दुस्तानी , हम हिन्दुस्तानी |
आज पुरानी जंज़ीरों को तोड़ चुके हैं ,
क्या देखें उस मंज़िल को जो छोड़ चुके हैं।
चाँद के दर पे जा पहुँचा है आज ज़माना ,
नये जगत से हम भी नाता जोड़ चुके हैं।
नया ख़ून है , नयी उमंगें , अब है नयी जवानी।
हम हिन्दुस्तानी , हम हिन्दुस्तानी |
हमको कितने ताजमहल हैं और बनाने ,
कितने ही अजंता हम को और सजाने।
अभी पलटना है रुख कितने दरियाओं का ,
कितने पवर्त राहों से हैं आज हटाने ।
नया ख़ून है , नयी उमंगें , अब है नयी जवानी।
हम हिन्दुस्तानी , हम हिन्दुस्तानी।
आओ मेहनत को अपना ईमान बनाएँ ,
अपने हाथों को अपना भगवान बनाएँ ।
राम की इस धरती को , गौतम की भूमि को ,
सपनों से भी प्यारा हिंदुस्तान बनाएँ।
नया ख़ून है , नयी उमंगें , अब है नयी जवानी।
हम हिन्दुस्तानी , हम हिन्दुस्तानी ।
हर ज़र्रा है मोती आँख उठाकर देखो ,
माटी में सोना है हाथ बढ़ाकर देखो।
सोने की ये गंगा है , चाँदी की यमुना ,
चाहो तो पत्थर से धान उगाकर देखो।
नया ख़ून है , नयी उमंगें , अब है नयी जवानी।
हम हिन्दुस्तानी , हम हिन्दुस्तानी
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मेरे देश की धरती सोना उगले
मेरे देश की धरती सोना उगले ,
उगले हीरे मोती
मेरे देश की धरती ।
बैलों के गले में जब घुँघरू जीवन का राग सुनाते हैं ,
ग़म कोसों दूर हो जाता है ,
खुशियों के कँवल मुस्काते हैं।
सुन के रहट की आवाज़े ,
यूँ लगे कहीं शहनाई बजे ,
आते ही मस्त बहारों के दुल्हन की तरह हर खेत सजे।
जब चलते हैं इस धरती पे हल ,
ममता अंगड़ाइयाँ लेती है।
क्यूँ ना पूजें इस माटी को जो जीवन का सुख देती है ।
इस धरती पे जिसने जनम लिया ,
उसने ही पाया प्यार तेरा ,
यहाँ अपना पराया कोई नहीं ,
है सब पे है माँ उपकार तेरा।
ये बाग़ है गौतम , नानक का ,
खिलते हैं अमन के फूल यहाँ ।
गांधी , सुभाष , टैगोर , तिलक ,
ऐसे हैं चमन के फूल यहाँ।
रंग हरा हरी सिंह नलवे से ,
रंग लाल है लाल बहादुर से ,
रंग बना बसंती भगत सिंह ,
रंग अमन का वीर जवाहर से ।
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